मऊ (चित्रकूट)।
मऊ नगर पंचायत में प्रस्तावित मर्चरी हाउस अब निर्माण से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है। पुराने अस्पताल के पास चिन्हित की गई जगह को लेकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने आपत्ति जताते हुए स्थान बदलने की मांग उठाई है
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मर्चरी हाउस कहां बनेगा। असली सवाल यह है कि जिस जगह को मर्चरी हाउस के लिए चुना गया है, वहां आसपास बस्ती और स्कूल होने के बावजूद इस स्थान को उपयुक्त कैसे माना गया?
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने अस्पताल के आसपास आबादी है और स्कूली बच्चों की आवाजाही भी रहती है। ऐसे में उनका तर्क है कि शवगृह के लिए ऐसी जगह चुनी जानी चाहिए जो आबादी और स्कूल से पर्याप्त दूरी पर हो।
ज्ञापन से शुरू हुआ विरोध, अब अधिकारियों की परीक्षा
इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने नगर पंचायत अध्यक्ष अमित द्विवेदी को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। ग्रामीणों ने अध्यक्ष के माध्यम से चित्रकूट जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और सीएमओ महेंद्र कुमार त्रिपाठी से भी प्रस्तावित स्थल पर पुनर्विचार करने और किसी दूसरे उपयुक्त स्थान का चयन कराने की मांग की है।
अब सवाल प्रशासन से भी है—क्या प्रस्तावित स्थल का चयन करने से पहले आसपास की आबादी, स्कूल, आवागमन और स्थानीय लोगों की आपत्तियों का पर्याप्त आकलन किया गया था?
अगर किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है?
और अगर नहीं किया गया था, तो इतनी संवेदनशील सुविधा के लिए जगह चिन्हित करने की प्रक्रिया आखिर कितनी गंभीरता से हुई?
ग्रामीणों की मांग: सुविधा जरूरी, लेकिन जगह भी सही हो
ग्रामीण मर्चरी हाउस के निर्माण के खिलाफ होने की बात नहीं कह रहे, बल्कि उनकी मांग प्रस्तावित स्थान को लेकर है। उनका कहना है कि मर्चरी हाउस आवश्यक सुविधा है, लेकिन इसके लिए बस्ती और स्कूल से दूर सुरक्षित एवं उपयुक्त स्थान चुना जाना चाहिए।
यही बात इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना देती है।
क्योंकि सवाल यह भी है कि अगर आज स्थानीय लोगों की आपत्ति को नजरअंदाज कर निर्माण शुरू कर दिया गया, तो कल इसी स्थान को लेकर विवाद खड़ा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
अध्यक्ष ने दिया आश्वासन, अब देखना होगा अगला कदम
ग्रामीणों के अनुसार नगर पंचायत अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने उनकी बात सुनी और आश्वासन दिया कि वह उच्च अधिकारियों से वार्ता कर दूसरी जगह चिन्हित कराने तथा उसी के अनुसार मर्चरी हाउस बनवाने का प्रयास करेंगे।
अब निगाह प्रशासनिक स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई पर है।
क्या प्रस्तावित स्थल का दोबारा निरीक्षण होगा?
क्या आबादी और स्कूल की मौजूदगी को ध्यान में रखकर नया स्थान तलाशा जाएगा?
क्या ग्रामीणों की आपत्ति पर लिखित स्तर पर कोई निर्णय लिया जाएगा?
फिलहाल मऊ में मर्चरी हाउस का मुद्दा सिर्फ निर्माण स्थल का मामला नहीं रह गया है। यह अब स्थानीय लोगों की आपत्ति, प्रशासनिक प्रक्रिया और सार्वजनिक सुविधा के लिए सही स्थान के चयन का सवाल बन चुका है।
ग्रामीणों की मांग साफ है—मर्चरी हाउस बने, लेकिन ऐसी जगह जहां आम आबादी और स्कूली बच्चों को असहज स्थिति का सामना न करना पड़े।
अब गेंद नगर पंचायत और जिला प्रशासन के पाले में है।
देखना यह है कि यह आश्वासन सिर्फ ज्ञापन तक सीमित रहता है या वास्तव में मर्चरी हाउस के लिए कोई नया स्थान चिन्हित किया जाता है।

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