असोह में खाली प्लॉट, दो जगह मिले मानव पैर… पुलिस जांच कर रही, लेकिन कई सवाल अभी बाकी
चित्रकूट के पहाड़ी थाना क्षेत्र का असोह गांव इस समय एक ऐसे रहस्य के केंद्र में है, जिसका पूरा जवाब अभी जांच के पास भी नहीं है। कर्वी–पहाड़ी मार्ग के पास भाजपा नेता जगदीश गौतम के खाली प्लॉट में मानव पैर मिलने के बाद मामला सामने आया। जांच के दौरान दूसरी ओर खेत से एक और पैर मिला। मौके पर गहरा गड्ढा, कपड़ों के चीथड़े और कुछ संदिग्ध सामग्री मिलने की बात भी सामने आई है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
दो दिन पहले सुना गया तेज धमाका
ग्रामीणों के अनुसार, घटना से करीब दो दिन पहले शाम के समय तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। उस समय इसे ट्रांसफॉर्मर फुंकने, आकाशीय बिजली या किसी अन्य घटना से जुड़ी आवाज समझकर ज्यादा पड़ताल नहीं की गई। मानव अंग मिलने के बाद वही आवाज अब जांच की एक अहम कड़ी बन गई है।
अब सवाल यह नहीं कि धमाका हुआ या नहीं।
सवाल यह है कि धमाके वाली जगह पर आखिर था कौन?
क्या वहां कोई व्यक्ति विस्फोटक से जुड़ी गतिविधि कर रहा था?
क्या यह विस्फोटक तैयार करने की कोशिश के दौरान हुआ हादसा था?
या जांच में कोई ऐसी दूसरी वजह सामने आएगी, जिसकी अभी किसी को कल्पना भी नहीं?
पुलिस इस संभावना की जांच कर रही है कि कहीं घटनास्थल पर विस्फोटक तैयार करने की कोशिश तो नहीं हुई थी। लेकिन यह अभी जांच का एक कोण है, प्रमाणित तथ्य नहीं। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और डॉग स्क्वायड को भी जांच में लगाया गया है। मानव अंगों की पहचान तथा विस्फोट के कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
अब राजनीति का सवाल क्यों?
एक तथ्य नजरअंदाज नहीं किया जा सकता—घटनास्थल वाला खाली प्लॉट भाजपा नेता जगदीश गौतम का बताया गया है और उन्होंने पुलिस को तहरीर भी दी है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का दौर सामने है। ऐसे समय किसी राजनीतिक कार्यकर्ता से जुड़े स्थान पर इस तरह की रहस्यमय घटना निश्चित रूप से स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। लेकिन अभी यह कहना कि इस घटना का चुनाव या राजनीति से कोई संबंध है, बिना जांच के उचित नहीं होगा।
Spy News न्यूज़ के सवाल
क्या धमाका और मिले मानव अंग एक ही घटना की कड़ी हैं?
दूसरा पैर दूसरी जगह कैसे पहुंचा?
मानव अंगों की अभी तक पहचान क्यों नहीं हो पाई?
और सबसे बड़ा सवाल—जिस शाम धमाके की आवाज सुनी गई, उस समय असोह के उस सुनसान प्लॉट पर आखिर हुआ क्या था?
जवाब जांच देगी, लेकिन सवाल उठाना जनता और पत्रकारिता का काम है।

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