बैंककर्मी को सपा नेता का संदेश: खूबसूरती से नौकरी तक… फिर मुख्यमंत्री कोटे से आईएएस बनाने का दावा, अब प्राथमिकी
मथुरा में महिला बैंककर्मी को संदेश भेजने के आरोप में सपा नेता राजन रिजवी पर प्राथमिकी, नौकरी से लेकर आईएएस बनाने के दावे तक उठे गंभीर सवाल
महिला ने बिना अनुमति निजी मोबाइल नंबर हासिल करने, आपत्तिजनक संदेश भेजने, पीछा करने और धमकी देने के आरोप लगाए; पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा ६७ के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कीमथुरा में एक महिला बैंककर्मी की शिकायत के बाद समाजवादी पार्टी के नेता राजन रिजवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने का मामला सामने आया है। महिला ने आरोप लगाया है कि बैंक में ग्राहक के रूप में आने वाले रिजवी ने बिना अनुमति उनका निजी मोबाइल नंबर हासिल किया और इसके बाद लगातार ऐसे संदेश भेजे, जिनसे वह असहज और मानसिक दबाव में महसूस करने लगीं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले को चर्चा में लाने वाली कथित बातचीत में महिला की सुंदरता और व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए नौकरी को उनके व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं बताया गया। इसके बाद कथित संदेश में कहा गया कि यदि भविष्य में राजनीति में आगे बढ़ते हैं और समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री से कहकर उन्हें प्रतिनियुक्ति के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में भेजने की कोशिश की जाएगी।
यहीं से मामला केवल व्यक्तिगत संदेशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक सवाल खड़ा करता है। क्या किसी राजनीतिक व्यक्ति को किसी महिला की नौकरी, पद या भविष्य को लेकर इस तरह का आश्वासन देने का अधिकार है? भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति निर्धारित संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से होती है। इसलिए किसी राजनीतिक प्रभाव के आधार पर ऐसी व्यवस्था का आश्वासन अपने आप में गंभीर जांच का विषय बन जाता है।
महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि नंबर अवरुद्ध करने के बाद भी उनका पीछा किया गया और उनकी तथा उनके परिवार की गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश की गई। शिकायत में कथित निगरानी, वाहन और परिवार से संबंधित जानकारी जुटाने तथा धमकी जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। महिला ने पुलिस से परिसर के सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर जांच की मांग की है।
पुलिस ने महिला की शिकायत पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा ६७ के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मामले की जांच जारी है और लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। कथित संदेशों की स्वतंत्र प्रामाणिकता भी जांच का विषय है।
इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि किसी भी महिला की गरिमा, निजता और कार्यस्थल की सुरक्षा को राजनीतिक पहचान, पद या प्रभाव से ऊपर रखा जाना चाहिए। आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला जांच और कानून करेगा; लेकिन शिकायत सामने आने के बाद निष्पक्ष जांच और जवाबदेही से पीछे हटने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
सवाल सिर्फ एक नेता के संदेशों का नहीं है—सवाल यह भी है कि क्या सत्ता और प्रभाव का नाम लेकर किसी महिला के निजी जीवन, नौकरी और भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है? इस सवाल का जवाब कानून, जांच और संस्थागत जवाबदेही से ही मिलना चाहिए।
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