Skip to main content

चित्रकूट में अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई, फिर भी क्यों कायम है दबंगई?

आबकारी टीम पर हमले से लेकर लगातार छापेमारी तक, सवाल सिर्फ शराब की बरामदगी का नहीं, बल्कि पूरे अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचने का है।

चित्रकूट में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। आबकारी विभाग और पुलिस समय-समय पर छापेमारी कर अवैध शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले लहन को नष्ट करने तथा कच्ची शराब बरामद करने की कार्रवाई करते रहे हैं। मार्च २०२६ में मालकाना क्षेत्र में आबकारी टीम ने करीब
पाँच सौ किलोग्राम लहन नष्ट किया और पैंतीस लीटर अवैध शराब बरामद की थी। जुलाई २०२६ में कुली तलैया क्षेत्र में भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई दर्ज हुई।


SPY NEWS

लेकिन सवाल केवल कार्रवाई का नहीं है।

करीब छह साल पहले, अप्रैल २०२० में चित्रकूट के टिकुरा क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ दबिश देने पहुंची
आबकारी टीम पर हमला हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, एक महिला सिपाही के साथ मारपीट की गई और उसकी वर्दी तक फाड़ दी गई। पुलिस के पहुंचने पर कई आरोपी मौके से भाग निकले, जबकि मां-बेटी को गिरफ्तार किया गया था।

यह पुरानी घटना आज भी एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। क्या अवैध शराब के खिलाफ हो रही कार्रवाई केवल भट्टियां तोड़ने, लहन नष्ट करने और शराब बरामद करने तक सीमित है, या फिर इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे सक्रिय लोगों और उनके तंत्र तक भी कार्रवाई की पहुंच बन रही है?

क्योंकि लहन नष्ट करना और कुछ लीटर शराब बरामद करना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन उस कारोबार को चलाने वाले लोगों, उसकी आपूर्ति व्यवस्था और बार-बार सक्रिय होने वाले ठिकानों तक पहुंचना उससे कहीं बड़ी चुनौती है।

सितंबर २०२६ में बरगढ़ क्षेत्र में शराब के ठेके के बाहर विवाद शांत कराने पहुंची डायल-११२ टीम पर चाकू से हमला हुआ और दो पुलिसकर्मी घायल हुए। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की थी।

यह घटनाक्रम कानून-व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करता है। यदि कार्रवाई करने पहुंचने वाली सरकारी टीमों को ही हमले का सामना करना पड़े, तो फिर अवैध कारोबारियों में कानून का भय कितना प्रभावी रह जाता है?

अगर अवैध शराब के ठिकाने बार-बार सामने आ रहे हैं, कार्रवाई भी लगातार हो रही है और इसके बावजूद कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हो रहा, तो जरूरत केवल छापेमारी की नहीं, बल्कि इस बात की गहराई से पड़ताल करने की है कि इस धंधे की जड़ आखिर कहां है।

स्पाई न्यूज़ का सवाल

क्या प्रशासन अवैध शराब के पूरे तंत्र की पहचान कर उसके खिलाफ ऐसी प्रभावी कार्रवाई करेगा, जिससे केवल भट्टियां ही नहीं टूटें, बल्कि पूरा अवैध कारोबार ही समाप्त हो?

खबर का असली सवाल यही है—कार्रवाई कितनी हो रही है, इसका आंकड़ा क्या है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि उस कार्रवाई के ठोस परिणाम आखिर कब दिखाई देंगे?

Comments

Popular posts from this blog

चित्रकूट में वो धमाका… अब सिर्फ धमाका नहीं, सवाल है

  असोह में खाली प्लॉट, दो जगह मिले मानव पैर… पुलिस जांच कर रही, लेकिन कई सवाल अभी बाकी चित्रकूट के पहाड़ी थाना क्षेत्र का असोह गांव इस समय एक ऐसे रहस्य के केंद्र में है, जिसका पूरा जवाब अभी जांच के पास भी नहीं है। कर्वी–पहाड़ी मार्ग के पास भाजपा नेता जगदीश गौतम के खाली प्लॉट में मानव पैर मिलने के बाद मामला सामने आया। जांच के दौरान दूसरी ओर खेत से एक और पैर मिला। मौके पर गहरा गड्ढा, कपड़ों के चीथड़े और कुछ संदिग्ध सामग्री मिलने की बात भी सामने आई है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। दो दिन पहले सुना गया तेज धमाका ग्रामीणों के अनुसार, घटना से करीब दो दिन पहले शाम के समय तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। उस समय इसे ट्रांसफॉर्मर फुंकने, आकाशीय बिजली या किसी अन्य घटना से जुड़ी आवाज समझकर ज्यादा पड़ताल नहीं की गई। मानव अंग मिलने के बाद वही आवाज अब जांच की एक अहम कड़ी बन गई है। अब सवाल यह नहीं कि धमाका हुआ या नहीं। सवाल यह है कि धमाके वाली जगह पर आखिर था कौन? क्या वहां कोई व्यक्ति विस्फोटक से जुड़ी गतिविधि कर रहा था? क्या यह विस्फोटक तैयार करने की कोशिश के दौरान हुआ हादसा था? या जांच में क...

बाढ़ के बीच SDM को पूर्व विधायक आनंद शुक्ला की फटकार, वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल—जवाबदेही या सियासी प्रदर्शन?

पूर्व विधायक ने अधिकारी पर बाढ़ प्रभावित गांवों में न पहुंचने का आरोप लगाया; अब सवाल यह कि तीखी फटकार के बाद धरातल पर पीड़ितों तक कितनी राहत पहुंची? चित्रकूट (SPY NEWS): चित्रकूट की मऊ-मानिकपुर विधानसभा के पूर्व विधायक आनंद शुक्ला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पूर्व विधायक बाढ़ प्रभावित इलाके में खड़े होकर मोबाइल फोन पर मऊ के एसडीएम से तीखे लहजे में बात करते और गांव न पहुंचने को लेकर सवाल करते नजर आ रहे हैं। वीडियो के साथ पूर्व विधायक ने लिखा है— “बाढ़ पीड़ितों के वास्तविक कष्ट देखने अधिकारी गाँव नहीं जायेंगे तो मुझसे खरी-खोटी सुनना पड़ेगा। नकारा अधिकारी चित्रकूट में नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है हर पीड़ित की सुनी जाये।” पूर्व विधायक का दावा है कि वह बाढ़ पीड़ितों की समस्या को लेकर प्रशासन से जवाब मांग रहे थे। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद अब एक बड़ा सवाल सामने है—क्या यह सिर्फ अधिकारी को फटकारने तक सीमित रहा या इसका असर बाढ़ प्रभावित गांवों तक भी पहुंचा? आवाज ऊंची हुई, अब असर कितना हुआ? जनप्रतिनिधि का जनता की समस्याओं को प्रशासन के ...

बैंककर्मी को सपा नेता का संदेश: खूबसूरती से नौकरी तक… फिर मुख्यमंत्री कोटे से आईएएस बनाने का दावा, अब प्राथमिकी

मथुरा में महिला बैंककर्मी को संदेश भेजने के आरोप में सपा नेता राजन रिजवी पर प्राथमिकी, नौकरी से लेकर आईएएस बनाने के दावे तक उठे गंभीर सवाल महिला ने बिना अनुमति निजी मोबाइल नंबर हासिल करने, आपत्तिजनक संदेश भेजने, पीछा करने और धमकी देने के आरोप लगाए; पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा ६७ के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की