चित्रकूट। मंदाकिनी नदी के पुनरुद्धार, पर्यावरण संरक्षण और बाढ़ क्षेत्र के व्यवस्थित सीमांकन को लेकर जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति, जिला वृक्षारोपण समिति एवं जिला आर्द्रभूमि समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में नदी संरक्षण से लेकर अतिक्रमण, सफाई, वृक्षारोपण और आर्द्रभूमियों के संरक्षण तक कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित शासकीय भूमि का राजस्व विभाग एवं वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से चिन्हांकन कराने के निर्देश दिए, ताकि चिन्हित भूमि पर पैचवार एवं लिनियर वृक्षारोपण कराया जा सके।
मंदाकिनी के फ्लड प्लेन का होगा सीमांकन
बैठक में मंदाकिनी नदी के 5 वर्ष, 25 वर्ष और 100 वर्ष के Flood Plain से संबंधित शासन की गाइडलाइन के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को शासन को भेजी गई कार्ययोजना के संबंध में पत्र भेजने तथा गाइडलाइन के अनुसार बाउंड्री पिलर लगाए जाने के निर्देश दिए। इससे नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के सीमांकन को स्पष्ट करने की दिशा में कार्य होगा।
10 बरसाती नालों में 6 किलोमीटर तक खुदाई
मंदाकिनी नदी के पुनरुद्धार के तहत वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत 10 बरसाती नालों में लगभग 6 किलोमीटर लंबाई में खुदाई का कार्य कराया गया है। रेहुंटा, परसौंजा, लोहदा और सरधुआ क्षेत्र में कराए गए इस कार्य पर लगभग 48 लाख रुपये खर्च हुए हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित कार्यों की लागत एवं विवरण का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश भी दिए।
यमुना तट की 46 आर्दभूमियों के प्रस्ताव तैयार
चित्रकूट जनपद में आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। सिंघानिया तालाब और बड़ा तालाब को पहले ही आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित कराया जा चुका है। वहीं अब यमुना नदी के तटीय क्षेत्र में स्थित 46 आर्दभूमियों के प्रस्ताव शासन को भेजने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए राजस्व विभाग से प्रमाणित मानचित्र और विवाद रहित प्रमाण पत्र अपेक्षित है।
मंदिरों और घाटों की सफाई पर भी जोर
जिलाधिकारी ने वन क्षेत्र में स्थित परानू बाबा और वाल्मीकि आश्रम सहित प्रमुख मंदिरों पर सफाई व्यवस्था के लिए सफाई कर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए। दुकानदारों से शुल्क संग्रह कर सफाई कर्मियों के मानदेय की व्यवस्था करने को कहा गया।
वहीं सुंदर घाट की बाढ़ में क्षतिग्रस्त सीढ़ियों की मरम्मत पितृ पक्ष से पहले कराने के निर्देश नगर पालिका को दिए गए। मंदाकिनी में गिरने वाले सीवरेज नालों को चिन्हित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग एवं संबंधित अधिशासी अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डीपी पाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं समिति के सदस्य मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने मंदाकिनी नदी के पुनरुद्धार से जुड़े सभी कार्यों में तेजी लाने और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।





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